मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF

मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित प्रश्न PDF Download

मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित प्रश्न PDF Download Dear Students आज के पोस्ट मे हम आपके लिए   मुगल काल का इतिहास PDF लेकर आये है जो की परीक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है  हमने निचे मुगल काल के शासक के बारे में विस्तार से जानकारी दी है जिसे आप लोग पढ़ ले,  इस पोस्ट में mugal kal history in hindi pdf में सभी मुगल साम्राज्य के प्रमुख शासक के बारे में इस Mugal kal history PDF में बताया गया है l

सरकारी नौकरी में  इतिहास से सम्बंधित प्रश्न जब पूछे जाते हैं जिसमे मुगल साम्राज्य के शासक से सम्बंधित कुछ  प्रश्न पूछ लिए जाते है l इस मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF को download करने के लिए हमने नीचे PDF File दी गई है l जिसे आप लोग download करके अपने मोबाइल या लैपटॉप मे सेव करके कभी भी पढ़ सकते है

मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF

mugal-samrajya-ka-itihas-notes-pdf

बाबर (1526-1530):

  • बाबर 1494 ई. में फरगना की गद्दी पर बैठा था। बाबर पितृपक्ष की ओर से तैमूर का 5वां और मातृ पक्ष की ओर से चंगेज का 5वां वंशज था। 1504 ई. में बाबर ने काबुल पर अधिकार किया।
  • बाबर का भारत की तरफ़ रुख करने का कारण था – ऑटोमान साम्राज्य के द्वारा सफावी शासकों की पराजय तथा उजबेको द्वारा ट्रांस-ऑक्सीयाना क्षेत्र पर अपना नियंत्रण कर लेना, जिससे बाबर की सेना को मजबूरन भारत की तरफ रुख करना |
  • काबुल की सीमित आय तथा तैमूर से प्रतिस्पर्धा करने के उद्देश्य से बाबर ने भारत पर आक्रमण किया।
  • बाबर को पंजाब के सूबेदार दौलत खां लोदी, आलम खां लोदी (इब्राहिम लोदी का चाचा) तथा राणासांगा ने भारत पर आक्रमण करने का निमन्त्रण दिया था। बाबर ने पानीपत के युद्ध से पूर्व भारत पर 4 बार आक्रमण किया।
  • पानीपत का पहला युद्ध 21 अप्रैल 1526 को बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच हुआ, जिसमें बाबर की विजय हुई।
  • इस युद्ध में उसने तुलगामा युद्ध पद्धति (गड्डो को सजाना) तथा उस्मानी विधि/रुमी पद्धति (तोपो को सजाना) के मिश्रण का उपयोग किया।
  • बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा में केवल 5 मुस्लिम शासकों (बंगाल, दिल्‍ली, मालवा, गुजरात एवं बहमनी) तथा 2 हिन्दू शासकों (मेवाड़ एवं विजयनगर) का उल्लेख किया है।
  • बाबर बागों को लगाने का बड़ा शौकीन था। उसने आगरा में एक बाग लगवाया, जिसे नूरे-अफगान (आधुनिक आरामबाग) कहा जाता था।
  • बाबर की मृत्यु आगरा में हुई तथा उसकी इच्छानुसार उसके शरीर को काबुल में जाकर एक बाग में दफनाया गया और उसकी कब्र पर कोई गुबंद या आकृति नहीं बनाई गई।
  • इसने सर्वप्रथम सुल्तान की परंपरा को तोड़कर अपने को बादशाह घोषित किया।
  • इसे भारत में बारुद के सर्वप्रथम उपयोंग का श्रेय दिया जाता है।
  • इसने भारत में गंनजिफा (तास का खेल) तथा ईश्कवाजी (कबूतरो का खेल) की शुरुआत की।

मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF  :- हुमायुँ (1530-1556):

  • बाबर का उत्तराधिकारी नसीरुद्दीन हुमायूँ 1530 ई. में हिन्दुस्तान के सिंहासन पर बैठा।
  • 1539 ई. में हुमायूँ और शेरशाह सूरी के मध्य चौसा का युद्ध हुआ, जिसमें हुमायूँ की पराजय हुयी। इस युद्ध में, अपनी जान बचाने के लिए हुमायूँ अपने घोड़े सहित गंगा में कूद पड़ा और भिश्ती की सहायता से अपनी जान बचाई हुमायूँ ने इस उपहार के बदले में उसे एक दिन का बादशाह बना दिया।
  • 1540 ई. में हुमायूँ और शेरशाह सूरी के मध्य विलग्राम (कन्नौज) का युद्ध हुआ, जिसमें हुमायूँ की पुनः पराजय हुयी और शेरशाह ने हिन्दुस्तान के तख्त पर कब्जा कर लिया |
  • इस युद्ध की पराजय ने हुमायूँ को 1555 ई. तक हिन्दुस्तान से बाहर ईराक के सफावी शासक के दरबार में निर्वासित जीवन जीने के लिए बाध्य कर दिया।
  • 1555 ई. में मुगलो और अफगानो के मध्य सरहिन्द स्थान पर युद्ध हुआ। इस युद्ध में अफगान सेना का नेतृत्व सिकंदर सूर तथा मुगल सेना का नेतृत्व बैरम खां ने किया।
  • अफगान बुरी तरह पराजित हुए। विजय के पश्चात्‌ हुमयूँ ने दिल्ली में प्रवेश किया और एक बार फिर भारत के सम्राट का ताज पहना |
  • किंतु एक वर्ष बाद ही (1556 ई.) दिल्‍ली में स्थित दीनपनाह स्थान पर पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर अचानक उसकी मृत्यु हो गई।
  • वह न तो एक अच्छा सेनानायक था और न ही अच्छा प्रशासक, किन्तु वह वह आशावादी और लगनशील व्यक्ति था।

शेरशाह सूरी (1540-1545):

  • इसके बचपन का नाम फरीद था। एक शेर को मारने के कारण इसका नाम शेर खां पड़ गया।
  • 1539 ई. में चौसा युद्ध तथा 1540 ई. में विलग्राम (कन्नौज) युद्ध में हुमायूँ को पराजित कर शेरशाह सूरी की उपाधि धारण की और अपने नाम का खुतबा पढ़वाया।
  • 1540 ई. में विजय के बाद यह हिन्दुस्तान के सिंहासन पर आसीन हुआ और सूरवंश की स्थापना की।
  • 1545 में कालिंजर अभियान के दौरान एक बारूद के विस्फोट में शेरशाह की मृत्यु हो गयी।

इसने अपने शासनकाल में निम्नलिखित कार्य किए:

  • मुद्रा सुधार – इसने पुराने घिसे-पटे तथा मिलावती सिक्‍को के स्थान पर स्वर्ण, चांदी और ताबे के प्रमाणित सिक्कों का
    प्रचलन शुरु किया। चांदी का रूपया ही बाद में मुगल व ब्रिटिश मुद्रा प्रणाली का आधार बना।
  • भू-राजस्व सुधार – इसने कृषि योंग्य भूमि की पैमाईश करवायी और मापन के लिए सिकंदरी गज तथा सन्‌ की डंडी का
    उपयोग किया। अपने राजस्व अधिकारी टोडरमल की सहायता से लगान वसूली के लिए जब्ती प्रणाली की शुरुआत
    की। इसे टोडरमल का बंदोबस्त भी कहते हैं।
  • कानून और व्यवस्था – कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए इसने कठोर व्यवस्था का अनुसरण किया। किसी भी क्षेत्र
    में कोई वारदात होने पर, इसने उस क्षेत्र के मुखिया को दंडित करने की व्यवस्था लागू की।
  • न्याय व्यवस्था – इसकी न्याय प्रक्रिया बहुत ही निष्पक्ष एवं कठोर थी। इसके पुत्र इस्लाम शाह सूरी ने कानूनो को
    संहिताबद्ध किया।
  • कर सुधार – इसने व्यापारियों पर लगाए जा रहे अनेक करो में एकरुपता प्रदान की। इसके समय में व्यापारियों से दो स्थानो पर दो तरह के कर वसूले जाते थे:

1. स़ीकरी गली – इसके अंतर्गत पूर्व से आए व्यापारियों को दो करो का भुगतान करना पड़ता था – प्रवेश कर और
इसके पश्चात्‌ बिक्री करा!
2. स्रिंधु नदी – इसके अंतर्गत पश्चिम से आए व्यापारियों को दो करो का भुगतान करना पड़ता था – प्रवेश कर और
इसके पश्चात्‌ बिक्री करा

मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF

  • परिवहन सुधार – इसने परिवहन के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया। इसने लोगो के आवागम के लिए कई सड़को का
    निर्माण करवाया, जिसमें मुख्य सड़के थीं – ग्रांड ट्रांक (बंगाल के सोनार गांव से आगरा व दिल्‍ली होते हुये लाहौर तक)
    सड़क की मरम्मत, आगरा-जोधपुर-चित्तौड़ सड़क का निर्माण तथा मुल्तान-लाहौर सड़क का निर्माणा

इसने यात्रियों की सुविधा के लिए प्रत्येक 2 कोष (लगभग 8 किमी) पर 4,700 सरायों का निर्माण करवाया अर्थात्‌ इन
सरायों का दायिया लगभग 13,600 किमी (1,700 x 8) तक था। इसके अतिरिक्त इसने यात्रियों के लिए उनके धर्म के
अनुसार रसोईयों की भी व्यवस्था की। इन सरायों के माध्यम से इसने गुप्तचर तथा डाक व्यवस्था को प्रोत्साहित किया।

  • वास्तुकला – इसने दिल्‍ली में पुराना किला तथा किले के अंदर “किला-ए-कुहना” नाम से मस्जिद का निर्माण करवाया।
    इसके ज्यादातर भवनों का निर्माण जल के मध्य होता था।

मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF

अकबर (1542-1605):

  • अकबर का जन्म अमरकोट के राणा प्रसाद के महल में 15 अक्टूबर, 1542 ई. में हुआ था। अकबर ने अपने बाल्यकाल
    में ही गजनी और लाहौर के सूबेदार के रूप में कार्य किया थो।
  • 1556 ई. में अकबर ने बैरम खाँ को अपना वकील (वजीर) नियुक्त कर उसे खान-ए-खाना की उपाधि प्रदान की।
    पानीपत का द्वितीय युद्ध वास्तविक रूप से अकबर के वकील एवं संरक्षक बैरम खाँ और मोहम्मद आदिलशाह सूर के
    वजीर एवं सेनापति हेमू (जिसने दिल्‍ली पर अधिकार कर अपने को स्वतंत्र शासक घोषित कर विक्रमादित्य की उपाधि
    धारण की थी) के बीच हुआ था।
  • कुछ लोगो ने बैरम खां को वगावत करने के लिए प्रेरित किया। परिणामतः इसके और अकबर के मध्य तिलवाड़ा का
    युद्ध हुआ, जिसमें अकबर की विजय हुयी। अकबर ने बैरम खां को 2 विकल्प दिए:

1. अकबर की अधीनता स्वीकार कर, उसके दरबार में शामिल हो जाए, या
2. माक्‍का की तीर्थ यात्रा पर चला जाए।

  • बैरम खां ने मक्का जाना उचित समझा तथा मक्का जाते समय मुबारक खाँ नामक एक अफगानी ने बैरम खाँ की हत्या
    कर दी।
  • बैरम खां की मृत्यु के बाद अकबर ने उसकी विधवा से विवाह किया और उसके पुत्र अब्दुर्रहीम को पाल-पोषकर खान-
    ए-खाना के पद तक पहुंचाया।

सम्राज्य विस्तार:

  • चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण के समय अकबर, जयमल और फकत्ता की वीरता से इतना प्रभावित हुआ कि इन दोनों वीरों की
    हाथी पर सवार प्रतिमा को आगरे के किले के मुख्यद्वार पर स्थापित करवा दिया।
  • अकबर ने अपनी गुजरात विजय की स्मृति में राजधानी फतेहपुर सीकरी की स्थापना की, जहां उसने एक बुलन्द
    दरवाजा बनवाया था। फतेहपुर सीकरी में इबादत खाना बनवाया। इबादत खाना में होने वाली चर्चा ने अद्वैतवाद के
    प्रचार में सहायता दी।
  • 1556 ई. में अकबर ने दाउद खाँ को पराजित कर उत्तर भारत से अन्तिम अफगान शासन का अन्त कर दिया।

अकबर के समय के विद्रोह:

  • 1564 ई. में उजबेकों ने विद्रोह कर दिया। यह अकबर के समय का पहला विद्रोह था।
  • 1586 ई. में अफगान के बलूचियों ने विद्रोह कर दिया। इसी विद्रोह के दौरान बीरबल की मृत्यु हुई थी।
  • 1599 ई. में शाहजादा सलीम (जहांगीर) ने पुर्तगालियों के साथ षड्यंत्र कर विद्रोह कर दिया तथा इलाहाबाद में अपने
    को स्वतंत्र बादशाह घोषित कर दिया।

शासन व्यवस्था:

अकबर ने संपूर्ण साम्राज्य को 45 सूबो (प्रांतो) में विभक्त कर दिया था। सूबों को सरकार (जिला), परगना (तहसील) तथा
गांवो में विभक्त कर दिया। इनका कार्यभार निम्नलिखित अधिकारियों द्वारा संचालित किया जाता था:

  • सूबा/प्रांतीय प्रशासन:

सिपासालार – यह कार्यकारी मुखिया था, जिसे बाद में निज़ाम या सूबेदार के नाम से जाने जाना लगा
दीवान – यह राजस्व विभाग का मुखिया था।
बख्शी – यह सैन्य विभाग का मुखिया था।

  • सरकार/जिला प्रशासन:

फौजदार – प्रशासनिक मुखिया
अमल/अमलगुजार – राजस्व वसूलने वाला अधिकारी।
कोतवाल – कानून व्यवस्था को संभालने वाला अधिकारी।

  • परगना/तहसील प्रशासन:

शिकदार – कानून व्यवस्था को संभालने वाला अधिकारी
आमिल/कानूनगो – राजस्व वसूलने वाला अधिकारी

  • ग्राम प्रशासन:

मुकद्दम – ग्राम प्रधान।
पटवारी – लेखपाल।
चौकीदार।

मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF  :-  अकबर की धार्मिक नीति:

  • अकबर की धार्मिक नीति का मूल उद्देश्य सार्वभौमिक सहिष्णुता थी। इसे सुलह-ए-कुल की नीति अर्थात्‌ सभी धर्मों के
    साथ शान्तिपूर्ण व्यवहार का सिद्धांत भी कहा जाता है। अकबर ने इस्लामी सिद्धांत के स्थान पर सुलह-ए-कुल की नीति
    अपनाई.
  • अकबर ने दार्शनिक एवं धर्मशास्त्रीय विषयों पर वाद-विवाद के लिए अपनी राजधानी फतेहपुर सीकरी में एक
    इबादतखाना (प्रार्थना-भवन) की स्थापना करवायी, जिसमें सभी धर्मों के विद्वान शामिल होते थे।
  • अकबर ने समस्त धार्मिक मामलों को अपने हाथों में लेंने के लिए 1579 ई. में महजरनामा या एक घोषणा जारी करवाया,
    जिसने उसे धर्म के मामलों में सर्वोच्च बना दिया। इस पर पाँच इस्लामी धर्मविदों के हस्ताक्षर थे।
  • इसने जजिया तथा तीर्थ करो को समाप्त कर दिया।
  • अकबर ने सभी धर्मों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए 1582 ई. में तौहीद-ए-इलाही/दीन-ए-इलाही नामक एक नयी
    परंपरा प्रवर्तित की, जिसमें ‘अल्लाह हू’ का मंत्र दिया जाता था। अकबर ने 1583 ई. में एक नये कैलेन्दर इलाही संवत्‌
    को जारी किया।
  • यह एक धर्मनिरपेक्ष शासक था

मनसबदारी व्यवस्था:

  • मनसबदारी व्यवस्था का संबंध मूलतः सैन्य व्यवस्था से था, जिसमें कुछ विशेष श्रेणी के घुड़सवार एवं कुशल सैनिक
    नियुक्त किए जाते थे, जो राजा के प्रति घनिष्ठ निष्ठा रखते थे। इसके अंतर्गत प्रत्येक अधिकारी को एक पद (मनसब/जात)
    दे दिया जाता है, जिसके अधीन निश्चित मात्रा में सवार (घुड़सवार एवं कुशल सैनिक) होते थे।
  • प्रत्येक घुड़सवार को दो घोड़े रखते होते थे। मनसबदारो को अपने वेतन के बदले राजस्व वसूलने का अधिकार होता
    था। अकबर के समय में मनसबदारों की 33 श्रेणियां थीं, जो 10 से 10,000 सैनिको को अपने पास रखते थे। मनसबदारो
    की नियुक्ति सैन्य विभाग का सर्वोच्च अधिकारी मीर बख्शी के द्वारा की जाती थी।

भू-राजस्व संबंधी सुधार:

  • अकबर ने राजस्व प्रशासन की योंजना तैयार करने के लिए टोडरमल को 1582 में शाही दीवान नियुक्त किया। राजस्व
    प्रशासन की संपूर्ण व्यवस्था टोडरमल द्वारा ही निर्मित की गई, जिसे बगदाद के काजी अबू याकुब की पुस्तक किताब-
    उल-खराज से ग्रहण किया गया।
  • टोडरमल के यह सुधार आइ-ने-दहशला (10 वर्षीय सुधार) के नाम से जाने गए। यह जब्ती प्रणाली का विकसित रुप है, जिसमें पिछले 10 वर्षो के उत्पादन तथा उत्पादन मूल्य के आंकलन के आधार पर 1/3 राजस्व निर्धारित किया जाता था। सामान्यतः यह आंकलन फसलो के रुप में होता था तथा वसूली नकदी रुप में होती थी।

-> कानूनगो – यह एक राजस्व अधिकारी होता था, जिसका कार्य राजस्व संबंधी आंकड़े एकत्रित करना था।
-> करोडी – यह एक करोड़ दाम (2.5 लाख रुपय अर्थात्‌ 1 रुपया + 40 दाम) के बराबर राजस्व की वसूली करने
वाला अधिकारी था।

मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF

अकबर ने उत्पादकता के आधार पर कृषि योग्य भूमि को 4 भागो में बांटा:

> पोलज – जिस पर प्रतिवर्ष खेती होती थी।
> परती – जिस पर एक वर्ष के अंतराल पर खेती होती थी।
> चाचर – जिसे 3-4 वर्षों तक बिना बोये छोड़ा जाता था।
> बंजर – इस भूमि को 5 या इससे अधिक वर्षों तक जोता-बोया नहीं जाता था।

सामाजिक सुधार:

  • इसने युद्ध बंदियों को दास बनाने की परंपरा समाप्त की, विधवाओ के पुनर्विवाह को प्रोत्साहित किया, सती प्रथा पर
    प्रतिबंध लगाया, बाल-विवाह निषेध किया
  • इसने विवाह के लिए लड़के की आयु 16 वर्ष तथा लड़की की आयु 14 वर्ष निर्धारित कर दी।

मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF  :- राजपूतो के साथ संबंध:

  • यह प्रथम शासक था, जिसने राजपूतो के साथ मधुर संबंध बनाए।
  • मेवाड़ राजपूतो को छोड़कर, शेष सभी राजपूतो ने इसकी अधीनता स्वीकार कर ली थी।

अकबर के नवरत्नः

  • अबुल फजल – फारसी विद्वान व सेनानायक
  • फैजी – फारसी विद्वान व कवि
  • बीरबल – हाजिर जबाब व चतुर मंत्री
  • तानसेन – दरबारी गायक व संगीतज्ञ
  • टोडरमल – भू राजस्व सूधारक
  • मानसिंह – सेनापति
  • अब्दूर्ररहीम खानखाना – हिन्दी कवि व सेनानायक
  • हमीम हुमाम – शाही पाठशाला का प्रधान
  • मुल्ला दो प्याजा – चतूर व वाकपटू दरबारी

मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF

जहाँगीर (1605-1627):

  • सलीम का जन्मे 30 अगस्त 1569 ई. को फतेहपुर सीकरी में स्थित शेख सलीम चिश्ती की कुटियां में आमेर (जयपुर)
    के राजा भारमल की पुत्री मरियम उल्लमानी के गर्भ से हुआ था।
  • सलीम ने जहांगीर (विश्वविजेता) की उपाधि ली और अकबर के आदर्शो पर ही चला। सलीम का मुख्य शिक्षक अब्बुर्रहीम
    खान-खाना था
  • जहाँगीर नें गद्दी पर बैठते ही “न्याय की प्रसिद्ध जंजीर” लगवायी। इसे चित्रकला की बहुत बारीक समझ थी तथा इसके
    दरबार में मनसूर नामक प्रसिद्ध चित्रकार था। इसने कश्मीर में शालीमार बाग बनवाया। इसने जनता के हितो के लिए
    12 अध्यादेश जारी किए।
  • जहांगीर के पुत्र खुसरो ने जहांगीर के विरुध विद्रोह कर दिया था, जिसे शरण देने के कारण ही जहाँगीर ने सिक्ख गुरू
    अर्जुन देव की हत्या करवा दी थी। गुरू अर्जुन देव ने स्वर्ण मंदिर का निर्माण करवाया। जुर्माना न भरने के कारण, इसने
    गुरु अर्जुन देव के पुत्र, हरगोविंद को 10 वर्षो के लिए ग्वालियर के किले में कैद कर दिया।
  • इसने मनसबदारी व्यवस्था में परिवर्तन किया और दु-अस्पाह तथा सी-अस्पाह सिद्धांत को लागू किया। इनके अंतर्गत
    जात (मनसब) में परिवर्तन किए बिना सवारो की संख्या क्रमश: दो गुणी तथा तीन गुणी कर दी गयी।
  • इसकी पत्नी नूरजहाँ ने जनता/जुन्ता वर्ग की स्थापना की, जिसमें उसके पिता एतमादुद्दौला, माता अस्मत बेगम, भाई
    आसफ खां तथा शाहजादा खुर्रम सम्मिलित थे। यह एक प्रकार दबाव समूह था।
  • जहाँगीर ने श्रीकान्त नामक एक हिड़ को हिन्दुओं का जज नियुक्त किया। जहाँगीर ने सूरदास को आश्रय दिया था और
    उसी के संरक्षण में सूरसागर की रचना हुई। जहाँगीर ने ही सर्वप्रथम मराठों के महत्व को समझा और उन्हें मुगल अमीर
    वर्ग में शामिल किया।
  • जहाँगीर के शासनकाल में हाकिन्स 1608-1611 ई. में और सर थॉमस-रो 1615-1619 ई. में आया था। जहाँगीर ने
    हाकिन्स को 400 का मनसब (पद) दिया था।

मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF

शाहजहाँ (1624-1658) :

  • शाहजहाँ का जन्म लाहौर में 5 जनवरी 1592 ईव को मारवाड़ के राजा उदयसिंह पुत्री जगत गोसाई के गर्भ से हुआ था।
    शाहजहाँ अपने सभी भाइयों एवं सिंहासन के सभी प्रतिद्वन्दियों तथा डावर बख्श को समाप्त कर 24 फरवरी 1628 को
    आगरे के सिंहासन पर बैठा। इसका शासनकाल भवन निर्माण तथा वास्तुकला का उत्कर्ष काल था।
  •  शाहजहाँ ने दक्षिण भारत में सर्वप्रथण अहमदनगर पर आक्रमण किया और 1633 ई. में उसे जीतकर मुगल साम्राज्य में
    मिला लिया तथा अन्तिम निजामशाही सुच्चान हुसैनशाह को ग्वालियर के किले में कैद कर लिया।
  • इसने मनसबदारी व्यवस्था में परिवर्तन किया, जिसमें जात (मनसब) में परिवर्तन किए बिना सवारो की संख्या 1/3 या
    1/4 या 1/5 कर दी।
  • शाहंजहा ने दिल्‍ली का लाल किला, जामा मस्जिद, आगरा की मोती मस्जिद व मुमताज महल की याद में ताजमहल
    बनवाया
  • शाहजहाँ के अन्तिम वर्ष आगरा के किले के शाहबुर्ज में एक बन्दी की तरह व्यतीत हुए। इस समय उसकी बड़ी पुत्री
    जहाँआरा ने साथ रहकर उसकी सेवा की थी। शाहजहाँ की मृत्यु 1666 ई. में हुई और उसे भी ताजमहल में उसकी
    पत्नी की कब्र के निकट दफना दिया गया।

औरंगजेब (1658-1707):

  • जब शाहजहां बीमार पड़ा, तो उसके पुत्रो (दारा, शुजा, औरंगजेब, मुराद बख्श) के बीच उत्तराधिकार का युद्ध आरंभ हो
    गया।
  • शाहजहां की बीमारी की खबर मिलने पर शुजा ने खुद को सम्राट घोषित कर दिया और आगरा की ओर मार्च शुरू कर
    दिया। किंतु वाराणसी के पास, दारा के नेतृत्व में एक सेना द्वारा उसे परास्त कर दिया गया।
  • मुराद बख्श ने इसी तरह गुजरात में खुद को ताज पहनाया।
  • औरंगजेब ने शुजा और मुराद के साथ एक गुप्त संधि की, जिसमें औरंगजेब ने उन्हे साम्राज्य के कुछ हिस्सो पर स्वतंत्र
    शासक के रूप में शासन करने का वचन दिया।
  • औरंगजेब और मुराद की संयुक्त सेना ने शाही की सेना को सामूगढ़ नामक स्थान पर हुए निर्णायक युद्ध (1658) में
    पराजित कर दिया। इस विजय के बाद औरंगजेब ने कूटनीति से मुराद को बंदी बनाकर, उसकी हत्या करावा दी।
  • औरंगजेब ने शुजा को खंजवा नामक स्थान पर हुए युद्ध (जनवरी 1959) में परास्त कर दिया।
  • औरंगजेब तथा दारा के मध्य हुई अंतिम लड़ाई (अप्रैल 1659) में दारा को पराजित किया और आलमगीर की उपाधि
    धारण कर, अपना राज्याभिषेक करवाया।
  • औरंगजेब के राजपूतो और मराठो से संबंध मधुर नहीं थे। इसने जजिया को पुनः लागू कर दिया। गुरू तेगबहादूर की
    हत्या करवा दी। हिन्दूओं के मंदिरों को तुड़वाया, पुराने मंदिरों की मरम्मत व नये मंदिरों के निर्माण पर प्रतिबंध लगा
    दिया।
  • शाहजहाँ ने दक्षिण भारत में सर्वप्रथण अहमदनगर पर आक्रमण किया और 1633 ई. में उसे जीतकर मुगल साम्राज्य में
    मिला लिया तथा अन्तिम निजामशाही सुच्चान हुसैनशाह को ग्वालियर के किले में कैद कर लिया।
  •  इसने मनसबदारी व्यवस्था में परिवर्तन किया, जिसमें जात (मनसब) में परिवर्तन किए बिना सवारो की संख्या 1/3 या
    1/4 या 1/5 कर दी।
  •  शाहंजहा ने दिल्‍ली का लाल किला, जामा मस्जिद, आगरा की मोती मस्जिद व मुमताज महल की याद में ताजमहल
    बनवाया
  • शाहजहाँ के अन्तिम वर्ष आगरा के किले के शाहबुर्ज में एक बन्दी की तरह व्यतीत हुए। इस समय उसकी बड़ी पुत्री
    जहाँआरा ने साथ रहकर उसकी सेवा की थी। शाहजहाँ की मृत्यु 1666 ई. में हुई और उसे भी ताजमहल में उसकी
    पत्नी की कब्र के निकट दफना दिया गया।

मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF

औरंगजेब (1658-1707):

  • जब शाहजहां बीमार पड़ा, तो उसके पुत्रो (दारा, शुजा, औरंगजेब, मुराद बख्श) के बीच उत्तराधिकार का युद्ध आरंभ हो
    गया।
  • शाहजहां की बीमारी की खबर मिलने पर शुजा ने खुद को सम्राट घोषित कर दिया और आगरा की ओर मार्च शुरू कर
    दिया। किंतु वाराणसी के पास, दारा के नेतृत्व में एक सेना द्वारा उसे परास्त कर दिया गया।
  • मुराद बख्श ने इसी तरह गुजरात में खुद को ताज पहनाया।
  • औरंगजेब ने शुजा और मुराद के साथ एक गुप्त संधि की, जिसमें औरंगजेब ने उन्हे साम्राज्य के कुछ हिस्सो पर स्वतंत्र
    शासक के रूप में शासन करने का वचन दिया।
  • औरंगजेब और मुराद की संयुक्त सेना ने शाही की सेना को सामूगढ़ नामक स्थान पर हुए निर्णायक युद्ध (1658) में
    पराजित कर दिया। इस विजय के बाद औरंगजेब ने कूटनीति से मुराद को बंदी बनाकर, उसकी हत्या करावा दी।
  • औरंगजेब ने शुजा को खंजवा नामक स्थान पर हुए युद्ध (जनवरी 1959) में परास्त कर दिया।
  • औरंगजेब तथा दारा के मध्य हुई अंतिम लड़ाई (अप्रैल 1659) में दारा को पराजित किया और आलमगीर की उपाधि
    धारण कर, अपना राज्याभिषेक करवाया।
  • औरंगजेब के राजपूतो और मराठो से संबंध मधुर नहीं थे। इसने जजिया को पुनः लागू कर दिया। गुरू तेगबहादूर की
    हत्या करवा दी। हिन्दूओं के मंदिरों को तुड़वाया, पुराने मंदिरों की मरम्मत व नये मंदिरों के निर्माण पर प्रतिबंध लगा
    दिया।
मुगल साम्राज्य का इतिहास Bhartiya Itihas pdf  Click Here
मुगल साम्राज्य का इतिहास से सम्बंधित Notes PDF  Click Here

Read Also

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker